10 January 2010

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( अश्कों के मायने खो गए, जब से हम दफ़न हो गए
करते-करते अकले बातें ,अरमान सारे ख़तम हो गए
जो पड़ोस से आई तेरी खुशबू, जज्बातों कों फिर हवा मिली
उठ बैठे कब्र में वापस, उम्मीद है फिर तेरे से वफ़ा की .... )

अकेले गुजारी है सारी ज़िन्दगी, दिल कों तेरी यादों का आसरा देके,
उठकर बैठे ज़रूर हैं, मगर ये न समझना कि हम सिर्फ तुझे ही देखे,
यहाँ और भी हसीनायें मौजूद हैं अपनी तबाही की दास्ताँ लेके,
आज बता भी दे कि ऐसा क्या था तुझमे ऐ कातिल, कि ये कदम सिर्फ तुझ पर बहके॥



( यादों का आसरा दिल को देते रहे, आँख उठी जब भी तेरे को ढूँढते रहे
तू मिली तो ना सही, अपने आंसुओं से तेरी तस्वीर को भिगोते रहे
एक दिन आयेगी तू यही सोचकर, और हसीनों की तरफ कदमो कों जाने से रोकते रहे
कातिल तेरी एक झलक के लिए, ज़िन्दगी भर मयखाने का रास्ता खोजते रहे... )

जानते हैं कि तू लौट कर अब कभी नहीं आएगी, चाहे किसी और का दामन थाम लूँ
मगर तुझे पाने कि ये तलब कभी नहीं जाएगी, चाहे किसी और हसीना का नाम लूँ
ये मत समझना कि तेरी तस्वीर कों भिगोया है हमने अपने अश्कों से,
अश्क तो बहते हैं उन हसीनो के अक्सर, जिनके पहलू आज भी तेरे नाम से सजा कर रखूँ॥



( लौट कर आने वालों की राह हम फिर देखते नहीं
जो गुजर गया उसके बारे में कभी फिर सोचते नहीं
किससे क्या गिला करें, कोई यहाँ हमारा नहीं
यह ज़िन्दगी हमारी है और हमें इसे जीना है ... )

राह उनकी मत देखो अब कि आँखें थक जायेंगी,
और फिर उनके आते ही ये निगाहें भी झुक जायेंगी,
तब कहोगे कि गुज़रा वक़्त लौट आने कों बेताब है,
सारी शिकायतें वहीं दम तोड़ देंगी, रुक जायेंगी॥



( लौट कर आने वालों की राह देखना नहीं
गुजर गया जो उसके बारे में फिर सोचना नहीं
मिला आखिर सब कुछ एक तेरे सिवा, फिर क्या गिला
देख जरा गौर से, ज़िन्दगी मुसकरा रही है
फिर जीने के लिए बुला रही हैं, फिर जीने के लिए बुला रही हैं.. )

तू मिलेगी नहीं इसलिए राह तकना छोड़ दिया,
और फिर घूम के मंज़र ने भी अपना रास्ता मोड़ दिया,
मत घबराना शायर तू अपने हालात से, इस बात से,
तेरी ख़ुमारी ने हमें उनकी यादों से दोबारा जोड़ दिया॥

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