18 February 2010

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(अच्छा हुआ कि आप गए .. हमें तो लगा था कि कोई कदरदान नहीं मिलेगा …)

यूँ इस तरह तुम हमें शर्मिन्दा ना करो,
कि आपकी कदर करना तो हमारे लिए इनायत है


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12 February 2010

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तारीफ उनकी करो, जो इस काबिल होते हैं..
हम तो एक काफिर हैं जो इज्ज़त पा के भी खोते हैं


शायर भी एक तरह का काफ़िर होता है,
जो सिर्फ दुश्मनी की कला में माहिर होता है


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2 February 2010

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मजबूरियों की फ़िक्र क्यूँ करते हो,
जब दोस्तों कों ही दुश्मनी की शिकायत है


आज वो मुझसे शिकायत करते हैं, और कहते हैं कि हमारे दिल के तुम करीब नहीं
अब उन्हें हम किस तरह समझाएँ, कि बनना चाहते हम उनके दिल के रकीब नहीं


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