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( मिटटी मेरी कब्र से चुरा रहा है कोई,
मर कर भी याद आ रहा है कोई,
ऐ खुदा इक पल की ज़िन्दगी और दे मुझे,
कि उदास मेरी कब्र से जा रहा है कोई...)
तुम्हारी कब्र से मिट्टी आजकल चुराता है सारा ज़माना,
ये इल्ज़ाम आज के बाद सिर्फ हम पर मत लगाना,
फिर जब तक ज़िन्दगी रहती है, क्यूँ हमसे गिला करते हैं वो,
जब हमारी कब्र पर बाद में उन्हें आकर पड़ता है आँसू बहाना॥
( कब्र की मिटटी उठा ले गया कोई,
उसी बहाने हमें छूकर गया कोई,
तन्हाई और अँधेरे में खुश थे हम,
लेकिन फिर से इंतज़ार करने की वजह दे गया कोई.... )
कब्र से मिटटी उठाने की दास्तान बहुत पुरानी है,
हमारे लिए ये उनके वजूद की बस इक निशानी है,
छू ना सके ताउम्र उन्हें हम अपनी मर्ज़ी से तो क्या,
हमने महसूस किया इस मिटटी में अभी बाकी उतनी ही जवानी है॥
( जनाज़ा तेरा उठा जो, मय्यत में हम न आये
कब्र में तेरी बैठकर, मिलने के सपने सजाये ..
सोचा था दुनिया के डर से , उन्होंने हमें नहीं अपनाया
इसलिये कब्र में उनकी बैठकर, इंतज़ार करने को जी आया..
मेरे सनम ने पता नहीं, लोगों को क्या समझाया
लोगों ने आकर उनको, दूसरी कब्र में दफनाया..
ऐ खुदा , आज तुझसे सवाल करने को मन आया
लोग तो उसके थे पर आज तुझसे भी क्यों हमने दगा खाया … )
जनाज़ा तेरा उठने ना देंगे, गर मय्यत में तेरी हम आ न पाए,
कब्र तेरी खुदने भी ना देंगे, गर मरने से पहले हम ना मिल पाए,
दुनिया से डरते डरते भी तूने मेरे इलज़ाम अपने सर लगाये,
क्या जानते थे हमारे इंतज़ार में तूने भी कितने ज़ख्म हैं खाए,
मौत के बाद भी ऐ सनम तेरे वही तेवर फिर नज़र आये,
ऐ खुदा ऐसी क्या खता थी मेरी, कि हम उसे इतना भाये,
पहले तो हम पर खून का इलज़ाम लगवाकर, हमारा क़त्ल करवा दिए,
और ख्याल रख सको हमारा, इस खातिर कब्रिस्तान में भी पड़ोसी बना लिए॥
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तुम्हारी कब्र से मिट्टी आजकल चुराता है सारा ज़माना,
ReplyDeleteये इल्ज़ाम आज के बाद सिर्फ हम पर मत लगाना,
wah wah ...