13 December 2009

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( चंद लम्हों की जिन्दगानी है,
नफरतों से जिया नहीं करते,
लगता है अब दुश्मनों से गुजारिश करनी पड़ेगी...
क्यूँकि दोस्त तो याद किया नहीं करते... )

वो ज़िन्दगी ही क्या जो चंद लम्हों में गुज़र जाए,
वो नफरतें ही क्या जो पल भर में उतर जाए,
एक तो हमारी बराबरी दुश्मनों से करते हो,
और फिर दोस्त कह कर तन्हाई में याद भी करते हो॥



( दर्द--दिल में कमी हो जाए
दोस्ती दुश्मनी हो जाए
तुम मेरी दोस्ती का दम भरो
आसमान मुद्दई हो जाए... )

दर्द--दिल में कमी ना हो तो दिल बेकरार रहता है,
दोस्ती दुश्मनी ना भी हो, फिर भी प्यार तो रहता है,
हमारे दम से ही है ये अपनी दोस्ती सलामत,
क्यूँकि इस मुद्दयी आसमान कों मनाना ही आखिर सबका मुकाम रहता है॥

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